शुक्रवार, 1 मार्च 2013

महंगाई


महंगाई में हालत हो गई खस्ता।
नहीं रहा अब कुछ भी सस्ता,
महंगे हो गये अनाज के दाम।
चारों तरफ है महंगाई का नाम,

                                                 महंगी हो गई रोटी, दाल।
                                                 अब बचे सिर्फ सिर के बाल,
                                                 महंगाई ने कर दिया दिल बेहाल।
                                                 ऐसी होती महंगाई की मार,

गरीब की है दुहाई।
बंद करो ये महंगाई,
आती तो मुझे रुलाई।
कब ख़त्म होगी महंगाई।।

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सही कहा है आपने महंगाई तो सुरसा के मुहं कि तरह बढती हि जा रही है !!

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  2. मंगलवार 18/06/2013 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं ....
    आपके सुझावों का स्वागत है ....
    धन्यवाद !!

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  3. बहुत सुन्दर शब्दों में महंगाई पर सुन्दर रचना
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest post पिता
    LATEST POST जन्म ,मृत्यु और मोक्ष !

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    1. जी ज़रूर , टिप्पणी के लिए धन्यवाद

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  4. दस साल से सरकार नित नयी तारीख कम होने के लिए दे रही है,अभी कुछ और इंतजार कीजिये.

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  5. बहुत ही सुंदर और यथार्थ पर आधारित

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